दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट के निर्माण के करीब भारत- फ्रांसीसी फर्म का दावा


भारत में परमाणु संयंत्र

फ्रांस की ऊर्जा कंपनी ईडीएफ (EDF) ने कहा कि उसने NPCIL के लिए महाराष्ट्र के जैतापुर में छह दबाव वाले वाटर रिएक्टर बनाने के लिए बाध्यकारी तकनीकी-वाणिज्यिक पेशकश जमा की है.

मुंबई.  फ्रांसीसी ऊर्जा समूह ईडीएफ (EDF) ने शुक्रवार को भारत में दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण में मदद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया. फ्रांस की ऊर्जा कंपनी ईडीएफ ने कहा कि उसने भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) के लिए महाराष्ट्र के जैतापुर (jaitapur nuclear power plant) में छह दबाव वाले वाटर रिएक्टर बनाने के लिए बाध्यकारी तकनीकी-वाणिज्यिक पेशकश जमा की है. ऊर्जा कंपनी ने इस कदम को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इस आधार पर आने वाले महीनों में एक बाध्यकारी समझौते की दिशा में चर्चा आगे बढ़ सकेगी.

जैतापुर में छह परमाणु ऊर्जा रियक्टरों के निर्माण के लिए वर्ष 2018 में दोनों पक्षों के बीच ‘औद्योगिक  समझौता’ होने के बाद एनपीसीआईएल और ईडीएफ के बीच वार्ता में प्रगति हुई. तकनीकी-वाणिज्यिक पेशकश के साथ-साथ परियोजना के वित्त पोषण पर बातचीत फिलहाल जारी है. इसके अलावा भारत में विनिर्माण के जरिये स्थानीयकरण बढ़ाने के तरीकों को लेकर दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श जारी है.

यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर- EDF के सीईओ
ईडीएफ समूह के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीन बर्नार्ड लेवी ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर हमारे भारतीय साझेदार के साथ बने विश्वास और ईडीएफ तथा एनपीसीआईएल के दलों के सहयोग और निरंतर प्रयासों के कारण हासिल हुआ है.’ भारत और फ्रांस परमाणु साझेदारी बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.एक बार पूरी तरह बन जाने के बाद यह प्लान्ट 10 गीगावाट बिजली देगी  जो लगभग 70 लाख घरों के लिए पर्याप्त है. उम्मीद है कि 15 साल में निर्माण पूरा हो जाएगा लेकिन निर्माण पूरा होने से पहले इसे बिजली पैदा करने में सक्षम होना होगा.

EDF नहीं बनाएगा पावर प्लांट
ईडीएफ के एक बयान में कहा गया कि अनुबंध को ‘अगले कुछ महीनों में अंतिम रूप’ मिल जाएगा. EDF, खुद पावर प्लांट का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन परमाणु रिएक्टरों देगा जिसमें यूएस पार्टनर GE स्टीम पावर शामिल है.  अभी तक इस बारे में कोई वित्तीय जानकारी जारी नहीं की गई है, लेकिन इसके दसियों अरब यूरो (डॉलर) होने का अनुमान है.

हालांकि जब यह प्लान्ट का प्रस्ताव हुआ था तो इसका बहुत विरोध किया गया था. साल 2011 में जापान स्थित फुकुशिमा में आई सुनामी के बाद इस पर काम की गति भी धीमी हो गई थी. 20 साल पहले शुरू हुई इस योजना के खिलाफ आवाज उठाने वाली शिवसेना फिलहाल बहुत कुथ नहीं बोल रही है.

EDF का आंकलन है कि इस परियजोना के जरिए निर्माण के दौरान 25,000 स्थानीय नौकरियां बनेंगी जबकि करीब 2700 लोगों को स्थायी नौकरियां मिलेंगी.  हालांकि इस परियोजना के बारे में कहा जा रहा है कि इससे भूकंप का जोखिम और बढ़ जाएगा साथ ही मछुआरों को इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

भारत ने पहले  ही अमेरिका, फ्रांस, रूस और जापान जैसे देशों के साथ परमाणु प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए कई समझौते किये हैं. भारत का पारंपरिक सहयोगी रूस इसे परमाणु ईंधन की आपूर्ति करता है .







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